संस्कृती संस्कार पुरीत

04 Dec 2025 17:17:05
 
🔹 संस्कृती संस्कार पुरीत 🔹
संस्कृती संस्कार पुरीत दिव्य अनुपम नेह बंधन
राष्ट्ररक्षा हित मनाये आओ हम सब रक्षाबंधन ||धृ ||
भरत भू जीवंत माता पुत्र सम अपना है नाता
है हमे प्रिय नदी पर्वत सजल निर्झर गीत गाता
प्रकृतीमय शृंगार करके करे हृद से मातृ पूजन ||1||
सब स्वजन आत्मीय मिलकर द्वेष हिंसा को मिटाये
राखी मे आबद्ध होकर भयनिराशा को भगाये
प्रेम आभामय जगत हो श्रावणी का पर्व अनुपम ||2||
ज्ञान गौरव अमिय अद्भुत वेद की गुंजे ऋचाये
कृष्ण की गीता सुनाती कर्म भक्ती की कथाये
ईश शाश्वत सर्वव्यापी जगनियंता है चिरंतन ||3||
है यही संकल्प सबका विश्वगुरू हो देश अपना
नवसृजन नव चिंतनासे सत्य होवे सुचिर सपना
विश्व से बंधुत्वमय हो सर्वदा भारत का जन जन ||4||
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