🔹 हम विजय की ओर बढते जा रहे 🔹संगठन का भाव भरते जा रहे ||धृ||यह सनातन राष्ट्र मंदिर है यहावेद की पावन ऋचाये गुंजतीप्रकृती का वरदान पाकर शक्तियां देव निर्मित इस धरा को पूजतीहम स्वयं देवत्व गढते जा रहे ||1||राष्ट्र की जो चेतना सोई पडीहम उसे फिरसे जगाने आ गयेपरम पौरुष की पताका हाथ लेक्रांती के नवगीत गाने आ गयेविघ्न बाधा शैल चढते जा रहे ||2||हम युवाओं का करे आहवान फिर शक्ति का नव द्वार पैदा हो सकेराष्ट्र रक्षा का महा अभियान लेसंगठन भी तीव्र गामी हो सकेलक्ष्य का संधान करते जा रहे ||3||